Antony Blinken At Unsc Said Nations Maintaining Close Ties With Moscow Concerned About Putin Invasion – Unsc: अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन बोले- मास्को के साथ निकट संबंध रखने वाले राष्ट्र पुतिन के आक्रमण से चिंतित

Antony Blinken At Unsc Said Nations Maintaining Close Ties With Moscow Concerned About Putin Invasion – Unsc: अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन बोले- मास्को के साथ निकट संबंध रखने वाले राष्ट्र पुतिन के आक्रमण से चिंतित


us secretary of state antony blinken at unsc briefing 1663872922 - Antony Blinken At Unsc Said Nations Maintaining Close Ties With Moscow Concerned About Putin Invasion - Unsc: अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन बोले- मास्को के साथ निकट संबंध रखने वाले राष्ट्र पुतिन के आक्रमण से चिंतित

US Secretary of State Antony Blinken at UNSC briefing
– फोटो : ANI

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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने गुरुवार को यूक्रेन में युद्ध के लिए रूस की आलोचना की और कहा कि मास्को के साथ ‘करीबी संबंध’ बनाए रखने वाले देशों ने सार्वजनिक रूप से संघर्ष की निंदा की है। ब्लिंकेन ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि राष्ट्रपति पुतिन के आक्रमण को लेकर रूस के सहयोगियों के बीच सवाल और चिंताएं थीं। ब्लिंकेन ने यूक्रेन में रूसी हमले के बारे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एक सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही।
 

ब्लिंकेन ने कहा कि “यहां तक कि मॉस्को के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखने वाले कई देशों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि राष्ट्रपति पुतिन के आक्रमण को लेकर उनके गंभीर प्रश्न और चिंताएं हैं।”

अमेरिका, रूस और यूक्रेन के विदेश मंत्री का पहली बार हुआ आमना-सामना
जैसे ही सुरक्षा परिषद की बैठक शुरू हुई, टेबल के चारों ओर पहले से ही एक आवेशित वातावरण के संकेत दिखे। बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा के बीच पहली बार आमना-सामना हुआ। ब्लिंकेन ने अपने पूरे संबोधन में यूएनएससी के हर सदस्य राष्ट्र से इस बाबत ‘स्पष्ट संदेश’ भेजने का आह्वान किया कि रूसी परमाणु हमले की धमकी हर हाल में रोकी जानी चाहिए।

पुतिन आग में घी डालने का काम कर रहे हैं: ब्लिंकेन
उन्होंने कहा, “जब (रूस-यूक्रेन) युद्ध की बात आती है तो सदस्य देशों के बीच उल्लेखनीय एकता दिखाई पड़ती है। विकासशील और विकसित देशों, बड़े और छोटे, उत्तर और दक्षिण के नेताओं ने युद्ध को समाप्त करने के लिए यूएनजीए में बात की है।” ब्लिंकेन ने आगे कहा कि विभिन्न देशों के नेताओं ने युद्ध समाप्त करने की आवश्यकता के बारे में बात की है। लेकिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने सैनिकों को वापस बुलाने के बजाय परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी से तनाव बढ़ाने का फैसला किया। वह आग में घी डाल रहे हैं। हम पुतिन को ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे।

गौरतलब है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि राष्ट्र को खतरा होने की सूरत में अपने लोगों की रक्षा के मद्देनजर परमाणु शक्ति संपन्न उनका देश हर उपलब्ध विकल्प का उपयोग करेगा। ब्लिंकेन ने कहा कि परिषद के सदस्य को यह साफ संदेश देना चाहिए कि बिना सोचे समझे परमाणु (हमले की) धमकी तत्काल रोकी जानी चाहिए। उन्होंने युद्ध अपराधों और अन्य अत्याचारों के आरोपों को गिनाया और अन्य देशों से आह्वान किया कि वे इसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें।

पीएम मोदी की टिप्पणी का अमेरिका ने किया स्वागत  
ब्लिंकेन ने कहा कि पिछले हफ्ते भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पुतिन को की गई टिप्पणी का अमेरिका द्वारा स्वागत किया गया है। बता दें कि एससीओ शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि ‘यह समय युद्ध का नहीं है’।

ब्लिंकेन के संबोधन से ठीक पहले, प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा कि भारत सहित अन्य देश रूस के खिलाफ बोल रहे हैं। अधिकारी ने कहा, “आप भारत समेत उन देशों के बढ़ते संकेत देख रहे हैं जिन्होंने अब तक इस मुद्दे पर बोलने से परहेज किया, अलग तरीके से बोल रहे हैं, जिसमें सीधे पुतिन के सामने की गई टिप्पणी शामिल है।”
   
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि पीएम मोदी की टिप्पणी “उनकी ओर से सिद्धांत का बयान है जिसे वह सही और न्यायसंगत मानते हैं”। उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी का अमेरिका द्वारा बहुत स्वागत किया गया है और भारतीय नेतृत्व, जिनका मास्को के साथ लंबे समय से संबंध हैं, ऐसी टिप्पणी करना इस संदेश को मजबूत करता है कि अब युद्ध समाप्त होने का समय आ गया है।”

तुर्की, चीन और भारत के नेताओं, जिनमें से सभी के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपेक्षाकृत सकारात्मक संबंध हैं, ने हाल ही में युद्ध पर सार्वजनिक रूप से अपनी दूरी बनाए रखी है, जिसे व्हाइट हाउस ने ‘दिलचस्प’ बताया है। अमेरिका के विदेश विभाग के पूर्व प्रवक्ता और व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में सामरिक संचार के समन्वयक जॉन किर्बी ने कहा कि मुझे लगता है कि उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन में चीन और भारत के नेताओं द्वारा जो कहा गया है, वह इस बात का संकेत है कि पुतिन यूक्रेन में जो कुछ भी कर रहे हैं, उसके लिए अब बहुत ज्यादा सहानुभूति नहीं है।

विस्तार

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने गुरुवार को यूक्रेन में युद्ध के लिए रूस की आलोचना की और कहा कि मास्को के साथ ‘करीबी संबंध’ बनाए रखने वाले देशों ने सार्वजनिक रूप से संघर्ष की निंदा की है। ब्लिंकेन ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि राष्ट्रपति पुतिन के आक्रमण को लेकर रूस के सहयोगियों के बीच सवाल और चिंताएं थीं। ब्लिंकेन ने यूक्रेन में रूसी हमले के बारे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के एक सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही।

 

ब्लिंकेन ने कहा कि “यहां तक कि मॉस्को के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखने वाले कई देशों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि राष्ट्रपति पुतिन के आक्रमण को लेकर उनके गंभीर प्रश्न और चिंताएं हैं।”

अमेरिका, रूस और यूक्रेन के विदेश मंत्री का पहली बार हुआ आमना-सामना

जैसे ही सुरक्षा परिषद की बैठक शुरू हुई, टेबल के चारों ओर पहले से ही एक आवेशित वातावरण के संकेत दिखे। बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा के बीच पहली बार आमना-सामना हुआ। ब्लिंकेन ने अपने पूरे संबोधन में यूएनएससी के हर सदस्य राष्ट्र से इस बाबत ‘स्पष्ट संदेश’ भेजने का आह्वान किया कि रूसी परमाणु हमले की धमकी हर हाल में रोकी जानी चाहिए।

पुतिन आग में घी डालने का काम कर रहे हैं: ब्लिंकेन

उन्होंने कहा, “जब (रूस-यूक्रेन) युद्ध की बात आती है तो सदस्य देशों के बीच उल्लेखनीय एकता दिखाई पड़ती है। विकासशील और विकसित देशों, बड़े और छोटे, उत्तर और दक्षिण के नेताओं ने युद्ध को समाप्त करने के लिए यूएनजीए में बात की है।” ब्लिंकेन ने आगे कहा कि विभिन्न देशों के नेताओं ने युद्ध समाप्त करने की आवश्यकता के बारे में बात की है। लेकिन रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने सैनिकों को वापस बुलाने के बजाय परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी से तनाव बढ़ाने का फैसला किया। वह आग में घी डाल रहे हैं। हम पुतिन को ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे।

गौरतलब है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि राष्ट्र को खतरा होने की सूरत में अपने लोगों की रक्षा के मद्देनजर परमाणु शक्ति संपन्न उनका देश हर उपलब्ध विकल्प का उपयोग करेगा। ब्लिंकेन ने कहा कि परिषद के सदस्य को यह साफ संदेश देना चाहिए कि बिना सोचे समझे परमाणु (हमले की) धमकी तत्काल रोकी जानी चाहिए। उन्होंने युद्ध अपराधों और अन्य अत्याचारों के आरोपों को गिनाया और अन्य देशों से आह्वान किया कि वे इसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें।


पीएम मोदी की टिप्पणी का अमेरिका ने किया स्वागत  

ब्लिंकेन ने कहा कि पिछले हफ्ते भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पुतिन को की गई टिप्पणी का अमेरिका द्वारा स्वागत किया गया है। बता दें कि एससीओ शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि ‘यह समय युद्ध का नहीं है’।

ब्लिंकेन के संबोधन से ठीक पहले, प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा कि भारत सहित अन्य देश रूस के खिलाफ बोल रहे हैं। अधिकारी ने कहा, “आप भारत समेत उन देशों के बढ़ते संकेत देख रहे हैं जिन्होंने अब तक इस मुद्दे पर बोलने से परहेज किया, अलग तरीके से बोल रहे हैं, जिसमें सीधे पुतिन के सामने की गई टिप्पणी शामिल है।”

   

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि पीएम मोदी की टिप्पणी “उनकी ओर से सिद्धांत का बयान है जिसे वह सही और न्यायसंगत मानते हैं”। उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी का अमेरिका द्वारा बहुत स्वागत किया गया है और भारतीय नेतृत्व, जिनका मास्को के साथ लंबे समय से संबंध हैं, ऐसी टिप्पणी करना इस संदेश को मजबूत करता है कि अब युद्ध समाप्त होने का समय आ गया है।”

तुर्की, चीन और भारत के नेताओं, जिनमें से सभी के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपेक्षाकृत सकारात्मक संबंध हैं, ने हाल ही में युद्ध पर सार्वजनिक रूप से अपनी दूरी बनाए रखी है, जिसे व्हाइट हाउस ने ‘दिलचस्प’ बताया है। अमेरिका के विदेश विभाग के पूर्व प्रवक्ता और व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में सामरिक संचार के समन्वयक जॉन किर्बी ने कहा कि मुझे लगता है कि उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन में चीन और भारत के नेताओं द्वारा जो कहा गया है, वह इस बात का संकेत है कि पुतिन यूक्रेन में जो कुछ भी कर रहे हैं, उसके लिए अब बहुत ज्यादा सहानुभूति नहीं है।