Asad Rauf Career Ended Due To Indian Model Spot Fixing Controversy Had To Survive By Selling Shoes In Pakistan – Asad Rauf Dies: भारतीय मॉडल के कारण खत्म हुआ था असद रऊफ का करियर, पाकिस्तान में जूते बेचकर करना पड़ा गुजारा

Asad Rauf Career Ended Due To Indian Model Spot Fixing Controversy Had To Survive By Selling Shoes In Pakistan – Asad Rauf Dies: भारतीय मॉडल के कारण खत्म हुआ था असद रऊफ का करियर, पाकिस्तान में जूते बेचकर करना पड़ा गुजारा


आईसीसी एलीट पैनल के पूर्व अंपायर पाकिस्तान के असद रऊफ का निधन बुधवार (14 सितंबर) को लाहौर में हो गया। साल 2000 से 2013 के बीच अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी अंपायरिंग का जलवा दिखाने वाले रऊफ की मौत हृदय गति रुकने से हुई। मशहूर अंपायर अलीम डार के साथ वह पाकिस्तान के उन प्रसिद्ध अंपायरों में शामिल किए जाते हैं जिन्होंने देश में अंपायरिंग के स्तर को बढ़ाने में योगदान दिया। हालांकि, उनके करियर का अंत यादगार नहीं रहा। विवादों के कारण उन्हें क्रिकेट मैदान से दूर होना पड़ा।

रऊफ पहली बार 2012 में विवादों में फंसे थे। मुंबई की एक मॉडल के साथ उनके अफेयर की खबरें जब सामने आई थी तब सभी हैरान हो गए थे। साल 2012 में मुंबई की मॉडल ने असद रऊफ पर दुष्कर्म के आरोप लगाए थे। मॉडल ने कहा था कि वो रऊफ के साथ रिलेशन में थी और उन्होंने उससे शादी का वादा किया था, लेकिन बाद में मुकर गए। हालांकि, रऊफ ने पहले ही इन आरोपों को खारिज कर दिया था। इस पर फिर से सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा था, “लड़की वाला मामला जब आया था तो मैं उसके अगले साल भी आईपीएल करवाने गया था।”

2016 में बीसीसीआई ने लगाया था बैन

रऊफ के करियर का सबसे बड़ा विवाद 2013 में सामने आया था। तब वह मैच फिक्सिंग में मामले में फंसे थे। आईपीएल 2013 में हुई मैच फिक्सिंग के मामले में जांच समिति ने असद रऊफ को भी दोषी पाया था। इसके बाद बीसीसीआई ने उन पर 2016 में पांच साल का बैन लगाया था। उन पर सट्टेबाजों से महंगे तोहफे लेने के आरोप थे। इस पर उन्होंने कहा “मैंने आईपीएल में अपना सबसे बेहतरीन समय बिताया, जब तक ये सारी समस्याएं नहीं आई थीं।” सट्टेबाजों से महंगे तोहफे लेने के आरोप में रऊफ ने कहा “उनसे मेरा तो कोई लेना-देना था ही नहीं, वो उन्हीं की तरफ से आए और उन्होंने ही फैसला ले लिया।”

लाहौर में जूते-चप्पल बेचते दिखे

बीसीसीआई द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उनका करियर का बर्बाद हो गया। वह लाहौर में जूते-चप्पल की दुकान चलाकर अपना पेट पालते दिखे। अपनी दुकान को लेकर रऊफ ने कहा था, ”वह यह दुकान अपने लिए नहीं चला रहे हैं। वह अपने स्टाफ के लोगों के लिए यह दुकान चला रहे हैं। ताकि उनकी रोजी-रोटी चल सके। वो और उनकी पत्नी पांच बार की नमाज पढ़ते हैं। उनका एक बेटा दिव्यांग है और दूसरा हाल ही में अमेरिका से अपनी पढ़ाई पूरी कर लौटा है। उनकी आदत है कि वो जो भी काम करते हैं, उसके शीर्ष पर जाते हैं। क्रिकेट खेला तो उसके शीर्ष पर गया। इसके बाद अंपायरिंग की तो उसके भी शीर्ष तक पहुंचे। अब उन्हें दुकानदारी में भी ऐसा करना है।”

मध्यक्रम में तेज बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे रऊफ

रऊफ ने 64 टेस्ट, 139 वनडे और 28 टी20 मैचों में अंपायरिंग की थी। इनमें से 15 टेस्ट, 41 वनडे और पांच टी20 थर्ड अंपायर के रूप में थे। रऊफ  मध्यक्रम में तेज बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे। उन्होंने प्रथम श्रेणी करियर के दौरान नेशनल बैंक और रेलवे के लिए खेला। 71 प्रथम श्रेणी मैचों में उनका औसत 28.76 का था।