Erratic Monsoon Damaging Crops Experts Say No Impact Likely On Food Security But Farmers Bearing Brunt – Weather: अनियमित बारिश से कम हुआ फसलों का उत्पादन, विशेषज्ञ बोले- खाद्य सुरक्षा पर नहीं होगा असर

Erratic Monsoon Damaging Crops Experts Say No Impact Likely On Food Security But Farmers Bearing Brunt – Weather: अनियमित बारिश से कम हुआ फसलों का उत्पादन, विशेषज्ञ बोले- खाद्य सुरक्षा पर नहीं होगा असर


gorakhpur monsoon 1656754418 - Erratic Monsoon Damaging Crops Experts Say No Impact Likely On Food Security But Farmers Bearing Brunt - Weather: अनियमित बारिश से कम हुआ फसलों का उत्पादन, विशेषज्ञ बोले- खाद्य सुरक्षा पर नहीं होगा असर

Gorakhpur Monsoon
– फोटो : अमर उजाला।

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कृषि और खाद्य नीति विशेषज्ञों ने कहा है कि इस मानसून के मौसम में अनियमित बारिश के कारण खरीफ की फसल के उत्पादन में मामूली गिरावट आई है। हालांकि इससे महंगाई बढ़ने या खाद्य सुरक्षा प्रभावित होने की संभावना नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास इससे निपटने के लिए पर्याप्त भंडार है। 

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अनिश्चित मानसून के कारण व्यक्तिगत तौर पर किसान सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। कई किसानों को अभी तक राज्य सरकारों से मदद नहीं मिली है।  
 
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बुधवार को पूर्वानुमान जारी किए। इसके मुताबिक, चावल उत्पादक प्रमुख राज्यों में खराब बारिश के कारण उत्पादन 104.99 मिलियन टन तक होने की संभावना है। पिछले साल चावल का उत्पादन 111 मिलियन टन हुआ था। 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गर्मी के मौसम की मुख्य फसल धान के तहत रकबा 3.99 करोड़ हेक्टेयर रह गया है। पिछले साल यह 4.17 करोड़ हेक्टेयर था। 
 
मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत के मुताबिक मानसून के कारम दक्षिण और मध्य भारत में अतिरिक्त बारिश हुई है, जबकि पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में कम बारिश दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि चावल उत्पादन में अनुमानित गिरावट भारतीय गंगीय मैदानों में बारिश की कमी से जुड़ी है। 

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कृषि और खाद्य नीति विशेषज्ञों ने कहा है कि इस मानसून के मौसम में अनियमित बारिश के कारण खरीफ की फसल के उत्पादन में मामूली गिरावट आई है। हालांकि इससे महंगाई बढ़ने या खाद्य सुरक्षा प्रभावित होने की संभावना नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास इससे निपटने के लिए पर्याप्त भंडार है। 

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अनिश्चित मानसून के कारण व्यक्तिगत तौर पर किसान सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। कई किसानों को अभी तक राज्य सरकारों से मदद नहीं मिली है।  

 

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने बुधवार को पूर्वानुमान जारी किए। इसके मुताबिक, चावल उत्पादक प्रमुख राज्यों में खराब बारिश के कारण उत्पादन 104.99 मिलियन टन तक होने की संभावना है। पिछले साल चावल का उत्पादन 111 मिलियन टन हुआ था। 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, गर्मी के मौसम की मुख्य फसल धान के तहत रकबा 3.99 करोड़ हेक्टेयर रह गया है। पिछले साल यह 4.17 करोड़ हेक्टेयर था। 

 

मौसम विशेषज्ञ महेश पलावत के मुताबिक मानसून के कारम दक्षिण और मध्य भारत में अतिरिक्त बारिश हुई है, जबकि पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में कम बारिश दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि चावल उत्पादन में अनुमानित गिरावट भारतीय गंगीय मैदानों में बारिश की कमी से जुड़ी है।