Government Angry Due To Weak Lobbying In High Court And Removed Two Deputy Advocates General And One Litigant – हाईकोर्ट में कमजोर पैरवी से सरकार नाराज: दो उप महाधिवक्ताओं और एक वाद धारक को हटाया

Government Angry Due To Weak Lobbying In High Court And Removed Two Deputy Advocates General And One Litigant – हाईकोर्ट में कमजोर पैरवी से सरकार नाराज: दो उप महाधिवक्ताओं और एक वाद धारक को हटाया


resignation 1459527067 - Government Angry Due To Weak Lobbying In High Court And Removed Two Deputy Advocates General And One Litigant - हाईकोर्ट में कमजोर पैरवी से सरकार नाराज: दो उप महाधिवक्ताओं और एक वाद धारक को हटाया

उप महाधिवक्ताओं और एक वादधारक को हटाया
– फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

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हाईकोर्ट में फौजदारी के मामलों में कमजोर पैरवी से नाराज प्रदेश सरकार ने दो उप महाधिवक्ताओं और एक वादधारक को हटा दिया है। सरकार ने अदालत में रिट, याचिकाओं और जमानत प्रार्थना पत्रों में राज्य की ओर से प्रभावी पैरवी न किए जाने पर घोर नाराजगी जाहिर की है। सचिव न्याय ने अलग से हिदायत भी जारी की कि लापरवाही के चलते न्यायालय से कोई प्रतिकूल आदेश पारित हुआ तो इसके लिए विधि अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

अपर सचिव न्याय आरके श्रीवास्तव के आदेश के मुताबिक, राज्य की ओर से उच्च न्यायालय में पैरवी व बहस के लिए आबद्ध उप महाधिवक्ता शेर सिंह अधिकारी और अमित भट्ट को हटा दिया गया है। उन्हें इस शर्त के साथ ही आबद्ध किया गया था कि राज्य सरकार किसी भी समय बिना पूर्व सूचना के उनकी आबद्धता (इंगेजमेंट) समाप्त कर सकती है। इनके अलावा पैरवी व बहस के लिए तैनात वादधारक (ब्रीफ होल्डर) को भी हटा दिया गया है। इस संबंध में महाधिवक्ता को अवगत करा दिया गया है।

Uttarakhand High Court: शिक्षकों से रिकवरी के आदेश पर रोक, पक्षकारों को नोटिस जारी कर मांगा जवाब

सचिव न्याय ने उच्च न्यायालय में कमजोर पैरवी के संबंध में महाधिवक्ता कार्यालय में तैनात शासकीय अधिवक्ता को भी निर्देश जारी किए हैं। कहा है कि रिट याचिकाओं व जमानत प्रार्थना पत्रों में जिस भी विधि अधिकारी को शासकीय अधिवक्ता वाद में राज्य का पक्ष रखने के लिए पहली बार नामित करें तो उसे अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी स्थिति में न बदलें। जो विधि अधिकारी वाद की स्थिति को जानता हो, वही अगली तिथियों में राज्य का पक्ष रखें।

हिदायत दी गई कि कोर्ट में किसी भी प्रकार लापरवाही की दशा में राज्य के पक्ष में कोई प्रतिकूल आदेश आता है तो इसके लिए विधि स्वयं उत्तरदायी होंगे। तय तिथि से पूर्व राज्य के संबंधित विभाग पुलिस, राजस्व पुलिस से प्रतिशपथ पत्र या पूरक तैयार कराने और शपथपत्र कोर्ट में दायर कराने की जिम्मेदारी नामित विधि अधिकारी की होगी। निर्देश दिए गए कि जिन मामलों में पुलिस, राजस्व पुलिस को पक्षकार बनाया जाता है तो ऐसे हर मामले में शासकीय अधिवक्ता अपर मुख्य सचिव गृह सचिव गृह व पुलिस कप्तानों को ईमेल  या फैक्स सूचित करेंगे। इस संबंध में एक रजिस्टर रखा जाएगा, जिसमें दिन प्रतिदिन एंट्री की जाएगी।

विभागों की लापरवाही पर सचिव व कप्तान को करेंगे सूचित
वाद में प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने में राज्य के किसी विभाग की कोई लापरवाही की जाती है तो विधि अधिकारी संबंधित जिले के एसएसपी या एसपी सचिव गृह को सूचित करेंगे।

विस्तार

हाईकोर्ट में फौजदारी के मामलों में कमजोर पैरवी से नाराज प्रदेश सरकार ने दो उप महाधिवक्ताओं और एक वादधारक को हटा दिया है। सरकार ने अदालत में रिट, याचिकाओं और जमानत प्रार्थना पत्रों में राज्य की ओर से प्रभावी पैरवी न किए जाने पर घोर नाराजगी जाहिर की है। सचिव न्याय ने अलग से हिदायत भी जारी की कि लापरवाही के चलते न्यायालय से कोई प्रतिकूल आदेश पारित हुआ तो इसके लिए विधि अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

अपर सचिव न्याय आरके श्रीवास्तव के आदेश के मुताबिक, राज्य की ओर से उच्च न्यायालय में पैरवी व बहस के लिए आबद्ध उप महाधिवक्ता शेर सिंह अधिकारी और अमित भट्ट को हटा दिया गया है। उन्हें इस शर्त के साथ ही आबद्ध किया गया था कि राज्य सरकार किसी भी समय बिना पूर्व सूचना के उनकी आबद्धता (इंगेजमेंट) समाप्त कर सकती है। इनके अलावा पैरवी व बहस के लिए तैनात वादधारक (ब्रीफ होल्डर) को भी हटा दिया गया है। इस संबंध में महाधिवक्ता को अवगत करा दिया गया है।

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सचिव न्याय ने उच्च न्यायालय में कमजोर पैरवी के संबंध में महाधिवक्ता कार्यालय में तैनात शासकीय अधिवक्ता को भी निर्देश जारी किए हैं। कहा है कि रिट याचिकाओं व जमानत प्रार्थना पत्रों में जिस भी विधि अधिकारी को शासकीय अधिवक्ता वाद में राज्य का पक्ष रखने के लिए पहली बार नामित करें तो उसे अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी स्थिति में न बदलें। जो विधि अधिकारी वाद की स्थिति को जानता हो, वही अगली तिथियों में राज्य का पक्ष रखें।

हिदायत दी गई कि कोर्ट में किसी भी प्रकार लापरवाही की दशा में राज्य के पक्ष में कोई प्रतिकूल आदेश आता है तो इसके लिए विधि स्वयं उत्तरदायी होंगे। तय तिथि से पूर्व राज्य के संबंधित विभाग पुलिस, राजस्व पुलिस से प्रतिशपथ पत्र या पूरक तैयार कराने और शपथपत्र कोर्ट में दायर कराने की जिम्मेदारी नामित विधि अधिकारी की होगी। निर्देश दिए गए कि जिन मामलों में पुलिस, राजस्व पुलिस को पक्षकार बनाया जाता है तो ऐसे हर मामले में शासकीय अधिवक्ता अपर मुख्य सचिव गृह सचिव गृह व पुलिस कप्तानों को ईमेल  या फैक्स सूचित करेंगे। इस संबंध में एक रजिस्टर रखा जाएगा, जिसमें दिन प्रतिदिन एंट्री की जाएगी।

विभागों की लापरवाही पर सचिव व कप्तान को करेंगे सूचित

वाद में प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने में राज्य के किसी विभाग की कोई लापरवाही की जाती है तो विधि अधिकारी संबंधित जिले के एसएसपी या एसपी सचिव गृह को सूचित करेंगे।