Stamp Theft From Power Of Attorney At Registry Office In Agra – Exclusive: आगरा में 50 रुपये के स्टांप शुल्क पर बिक गईं 50-50 लाख की संपत्तियां, ऐसे हुआ ‘खेल’

Stamp Theft From Power Of Attorney At Registry Office In Agra – Exclusive: आगरा में 50 रुपये के स्टांप शुल्क पर बिक गईं 50-50 लाख की संपत्तियां, ऐसे हुआ ‘खेल’


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आगरा की सदर तहसील स्थित रजिस्ट्री दफ्तर में पावर ऑफ अटोर्नी की आड़ में स्टांप चोरी का ‘खेल’ चल रहा है। 50 रुपये स्टांप शुल्क पर 50-50 लाख रुपये की संपत्तियां बिक गई। सब रजिस्ट्रार व दलालों के गठजोड़ के आगे यहां नियम बौने साबित हो रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कमिश्नर व डीएम के आदेश के बाद भी न किसी पॉवर ऑफ अटोर्नी की जांच की गई न दोषियों पर कार्रवाई हो सकी।

जिले में 10573 संपत्तियों में 165 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी हो चुकी है। निजी बिल्डर्स व कॉलौनाइजर्स ने ही 100-100 रुपये के नोटरी एग्रीमेंट पर 25-25 लाख के फ्लैट बेच दिए। 3983 प्लैट में करीब 122.55 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी का खुलासा होने के बाद रजिस्ट्री दफ्तर में हड़कंप है। दूसरी तरफ पावर ऑफ अर्टानी से स्टांप चोरी के मामलों में सहायक महानिरीक्षक व सब रजिस्ट्रार ने जांच शुरू नहीं की। जबकि डीएम प्रभु एन सिंह ने सभी पावर ऑफ अटोर्नी की जांच के आदेश दिए थे। 15 दिन बाद भी नतीजा शून्य है।

ऐसे होता है पूरा खेल 

जानकारों का कहना है कि पॉवर ऑफ अटोर्नी में 50 रुपये का स्टांप शुल्क लगता है। पावर ऑफ अटोर्नी सिर्फ रक्त संबंध में होती है, लेकिन कमीशन की आड़ में गैर रक्त संबंधों में भी पावर ऑफ अटोर्नी हो रही हैं। जिनसे सरकार को करोड़ों रुपये के स्टांप शुल्क का चूना लगाया जा रहा है। पॉवर ऑफ अटोर्नी से पक्षकार को संपत्ति बिक्रय का अधिकार मिल जाता है।

रजिस्ट्री दफ्तर में एआईजी से लेकर सब रजिस्ट्रार व बाबूओं के दामन पर अनियमितताओं के दाग हैं। कई एफआईआर दर्ज हैं। फिर भी रजिस्ट्री दफ्तर में न स्टांप चोरी रुक रही, न कार्रवाई हो रही। जन प्रहरी के संयोजक नरोत्तम शर्मा का कहना है कि पूरा ‘खेल’ अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। ऐसे में प्रशासन के रवैये पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

एक दिन में ठप हो गई जांच

हेलियोस अपार्टमेंट, कावैरी कौस्तुभ, आनंदा रघुराम, पारस पर्ल्स, गणपति किंग्स काउंटी सहित 6 अपार्टमेंट में डीएम के निर्देश पर एआईजी स्टांप सुनील कुमार ने एक दिन जांच की। 618 फ्लैट बिना रजिस्ट्री मिले। 24 घंटे में दस्तावेज नहीं प्रस्तुत करने पर बिल्डर को कार्रवाई की चेतावनी दी गई, लेकिन सात दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। न टीम दोबारा जांच के लिए गई। एक दिन में ही जांच ठप हो गई।

दर्ज होंगे मुकदमे

एडीएम वित्त एवं राजस्व यशवर्धन श्रीवास्तव ने कहा कि स्टांप चोरी करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई होगी। जांच चल रही है। उनके विरुद्ध मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। स्टांप शुल्क की वसूली होगी। 
 

विस्तार

आगरा की सदर तहसील स्थित रजिस्ट्री दफ्तर में पावर ऑफ अटोर्नी की आड़ में स्टांप चोरी का ‘खेल’ चल रहा है। 50 रुपये स्टांप शुल्क पर 50-50 लाख रुपये की संपत्तियां बिक गई। सब रजिस्ट्रार व दलालों के गठजोड़ के आगे यहां नियम बौने साबित हो रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कमिश्नर व डीएम के आदेश के बाद भी न किसी पॉवर ऑफ अटोर्नी की जांच की गई न दोषियों पर कार्रवाई हो सकी।

जिले में 10573 संपत्तियों में 165 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी हो चुकी है। निजी बिल्डर्स व कॉलौनाइजर्स ने ही 100-100 रुपये के नोटरी एग्रीमेंट पर 25-25 लाख के फ्लैट बेच दिए। 3983 प्लैट में करीब 122.55 करोड़ रुपये की स्टांप चोरी का खुलासा होने के बाद रजिस्ट्री दफ्तर में हड़कंप है। दूसरी तरफ पावर ऑफ अर्टानी से स्टांप चोरी के मामलों में सहायक महानिरीक्षक व सब रजिस्ट्रार ने जांच शुरू नहीं की। जबकि डीएम प्रभु एन सिंह ने सभी पावर ऑफ अटोर्नी की जांच के आदेश दिए थे। 15 दिन बाद भी नतीजा शून्य है।

ऐसे होता है पूरा खेल 

जानकारों का कहना है कि पॉवर ऑफ अटोर्नी में 50 रुपये का स्टांप शुल्क लगता है। पावर ऑफ अटोर्नी सिर्फ रक्त संबंध में होती है, लेकिन कमीशन की आड़ में गैर रक्त संबंधों में भी पावर ऑफ अटोर्नी हो रही हैं। जिनसे सरकार को करोड़ों रुपये के स्टांप शुल्क का चूना लगाया जा रहा है। पॉवर ऑफ अटोर्नी से पक्षकार को संपत्ति बिक्रय का अधिकार मिल जाता है।