Uttarakhand News: Ban On Mining For One Kilometer On Both Sides Of The Bridges – Uttarakhand: प्रदेशभर में पुलों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर तक खनन पर रोक, शासन ने जारी किए निर्देश

Uttarakhand News: Ban On Mining For One Kilometer On Both Sides Of The Bridges – Uttarakhand: प्रदेशभर में पुलों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर तक खनन पर रोक, शासन ने जारी किए निर्देश


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उत्तराखंड शासन ने प्रदेशभर में नदी क्षेत्र के दोनों ओर पुलों के एक-एक किलोमीटर के दायरे में खनन पर रोक लगा दी है। इस संबंध में प्रमुख सचिव की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। इस वर्ष मानसून सीजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों में अतिवृष्टि के कारण कई पुलों को नुकसान पहुंचा है।

जिलाधिकारियों को जारी निर्देश में कहा गया है कि राज्य सरकार की ओर से निर्धारित खनन नीति के तहत विभिन्न स्थानों पर खनन की अनुमति दी जाती है। लेकिन, देखने में आ रहा है कि खनन के लिए निर्धारित स्थलों के अलावा नदी क्षेत्र में बने पुलों के नजदीक भी खनन किया जा रहा है। बीते दिनों वर्षाकाल में इसके कारण तमाम पुलों को क्षति पहुंची है।

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कहा गया कि पुलों के नजदीक खनन करना खनन नीति का उल्लंघन है। इससे नदियों के ऊपर बने पुलों की बुनियाद कमजोर हो रही है। इसलिए नदी क्षेत्र में बने पुलों के दोनों तरफ एक-एक किमी तक मिट्टी, रेत, बजरी, पत्थर आदि के खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध किया जाता है।

पूर्व में हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला 

बताते चलें कि इससे पूर्व भी समय-समय पर शासन की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 17 अक्तूबर 2016 को प्रदेशभर में नदी क्षेत्र में बने पुलों के एक किमी डाउन स्ट्रीम और एक किमी अपस्ट्रीम में खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। तीन जुलाई 2019 को उच्चतम न्यायालय ने नदी क्षेत्र के दोनों ओर खनन पर लगे प्रतिबंध को निरस्त कर दिया था। अब पुन: सरकार की ओर से खुद ही पुलों के एक किमी के दायरे पर रोक लगा दी गई है।

इस मानसून सीजन में नदी क्षेत्र में बने तमाम पुलों को अनियंत्रित खनन के कारण नुकसान पहुंचा है। देखने में आया है कि कई जगहों पर पुलों के बेहद करीब तक खनन किया गया था। इससे पुलों की बुनियाद कमजोर पड़ जाती है। पुलों की सुरक्षा की दृष्टि से जिलाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
– आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव, उत्तराखंड शासन

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उत्तराखंड शासन ने प्रदेशभर में नदी क्षेत्र के दोनों ओर पुलों के एक-एक किलोमीटर के दायरे में खनन पर रोक लगा दी है। इस संबंध में प्रमुख सचिव की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। इस वर्ष मानसून सीजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों में अतिवृष्टि के कारण कई पुलों को नुकसान पहुंचा है।

जिलाधिकारियों को जारी निर्देश में कहा गया है कि राज्य सरकार की ओर से निर्धारित खनन नीति के तहत विभिन्न स्थानों पर खनन की अनुमति दी जाती है। लेकिन, देखने में आ रहा है कि खनन के लिए निर्धारित स्थलों के अलावा नदी क्षेत्र में बने पुलों के नजदीक भी खनन किया जा रहा है। बीते दिनों वर्षाकाल में इसके कारण तमाम पुलों को क्षति पहुंची है।

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कहा गया कि पुलों के नजदीक खनन करना खनन नीति का उल्लंघन है। इससे नदियों के ऊपर बने पुलों की बुनियाद कमजोर हो रही है। इसलिए नदी क्षेत्र में बने पुलों के दोनों तरफ एक-एक किमी तक मिट्टी, रेत, बजरी, पत्थर आदि के खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध किया जाता है।

पूर्व में हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला 

बताते चलें कि इससे पूर्व भी समय-समय पर शासन की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 17 अक्तूबर 2016 को प्रदेशभर में नदी क्षेत्र में बने पुलों के एक किमी डाउन स्ट्रीम और एक किमी अपस्ट्रीम में खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। तीन जुलाई 2019 को उच्चतम न्यायालय ने नदी क्षेत्र के दोनों ओर खनन पर लगे प्रतिबंध को निरस्त कर दिया था। अब पुन: सरकार की ओर से खुद ही पुलों के एक किमी के दायरे पर रोक लगा दी गई है।

इस मानसून सीजन में नदी क्षेत्र में बने तमाम पुलों को अनियंत्रित खनन के कारण नुकसान पहुंचा है। देखने में आया है कि कई जगहों पर पुलों के बेहद करीब तक खनन किया गया था। इससे पुलों की बुनियाद कमजोर पड़ जाती है। पुलों की सुरक्षा की दृष्टि से जिलाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

– आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव, उत्तराखंड शासन